पकौड़ी नीति – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

गलती तभी होती है जब कोई भी विकल्प नहीं होतासमस्या जस की तस रह जाती,काया कल्प नहीं होता।उत्पादन कम और बड़ी जन समूह, कौन बचाएगा इसेखेत से लेकर बाजार तक,कम दामों में कौन लाएगा इसे।खेतों की उर्वरकता घट गई, खाद और रसायन तत्व कब तकवास्तविकता से अलग हो कर, बचाते रहेंगे अस्तित्व कब तक।रसायनिक से पैदावार बढ़ाए जा रहे,उमर की सीमा घटाये जा रहेफल सब्जियां सुई देकर, बढ रहे अब,अधकच्चे को पकाये जा रहे।मिलावट की ये हद हो गई, अछूती अब कुछ भी नहीं हैकिसान अब रो रोकर मर रहे,छूटी अब कुछ भी नहीं है।दलालों की कट रही चांदी, गरीबों का हाल अब बेहाल हैहर तरफ मारा मारी, हर तरफ बेकारी,सब माया जाल है।चिकित्सक लूट रहे, शिक्षक बिक रहे, वकीलों का बाजार गरम हैछल, कपट, अपहरण, लूट घोटाला, अश्लीलों का बाजार चरम है।हद हो गई, सरकार की पकौड़ी नीति और चाय की गरम प्यालीमुहल्ले की चार दुकानें चलती नहीं, चौदह खोल कर बैठे खाली।एक लाख वालों की कुर्की जब्ती, सौ करोड़ वालों को चुम्मा-चाटीबैंक वाले अजब- गजब है भैया, ऐसे-वैसे खोजते पौआ – पाटी।नियम कानून, सारे गरीब के उपर,अमीर बजाते तालीविन्दु सोचता यही रह गया, किसको दें अब गाली।

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18 Comments

  1. Bhawana Kumari 07/02/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/02/2018
  2. Madhu tiwari 07/02/2018
    • Madhu tiwari 08/02/2018
      • Bindeshwar Prasad sharmaकक 08/02/2018
  3. Bindeshwar Prasad sharmaकक 07/02/2018
  4. C.M. Sharma 08/02/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/02/2018
  5. Dknivatiya 08/02/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/02/2018
  6. Kajalsoni 09/02/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/02/2018
  7. angel yadav 10/02/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/02/2018
  8. Shishir "Madhukar" 11/02/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 12/02/2018
  9. ANU MAHESHWARI 12/02/2018
  10. Bindeshwar prasad sharma 12/02/2018

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