नूर हूँ मै – डी के निवातिया

नूर हूँ मै

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तेरे मुखमंडल की आभा सेप्रज्वलित होता दीप हूँ मैंतेरे ही आशीर्वचनो सेफलीभूत होता आशीष हूँ मैतुम कारक, कारण तुम हीतुम से उपजा बीज हूँ मैतेरी ज़िन्दगी का सफ़र मैतेरी गर्दिशों की धूप हूँ मैमुझको डरना कैसा मुश्किल से जब तक तेरे प्रेम कवच के समीप हूँ मैये तन-मन सब तुमसे है मेरी माँइस जग में तेरी ही आँखों का तो नूर हूँ मै !!

डी के निवातिया

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18 Comments

  1. C.M. Sharma 30/01/2018
    • डी. के. निवातिया 27/02/2018
  2. Shishir "Madhukar" 30/01/2018
    • डी. के. निवातिया 27/02/2018
    • डी. के. निवातिया 27/02/2018
  3. Bhawana Kumari 30/01/2018
    • डी. के. निवातिया 27/02/2018
  4. अरुण कुमार तिवारी 30/01/2018
    • डी. के. निवातिया 27/02/2018
  5. Anu Maheshwari 30/01/2018
    • डी. के. निवातिया 27/02/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma 31/01/2018
    • डी. के. निवातिया 27/02/2018
  7. Kajalsoni 02/02/2018
    • डी. के. निवातिया 27/02/2018
  8. Madhu tiwari 03/02/2018
    • डी. के. निवातिया 27/02/2018

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