मोहब्बत फिर से उछलेगी

मुझे मालूम है तू आज भी मुझसे नाराज हैमुझे न है पता कुछ भी मेरे दिल की आवाज है

भले सिर पर मेरे रखा कोई शोहरत का ताज हैमगर दिल तो मेरा तेरी मोहब्बत का मोहताज है

खुदा लौटा दे वो सावन जो फिर मोहब्बत को बरसा देकोई बादल हो जो उसको मुझे पाने को तरसा दे

तुझे पाने की चाहत में दीवाने यूँ हुए जानमन सुध खुद की कोई अब है बेगाने सब हुए जानम

तेरे नाम से चिढ़ाकर मुझे सब परेशान करते हैभिगोकर मेरे नैना को बेचैनी उत्थान करते है

ओ पंछियों घुम्मकड़ बादलों हवा का रुख बदल देनाजब जब दीखे जो मेरी जान मोहब्बत से मचल देना

जो मचलोगे मोहब्बत से सामने उसके बारम्बारमोहब्बत फिर से उछलेगी तो आएगी याद मेरी हर बार

 कवि – मनुराज वार्ष्णेय

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

5 Comments

  1. Bhawana Kumari 30/01/2018
  2. Anu Maheshwari 30/01/2018
  3. Bindeshwar Prasad sharmaकक 30/01/2018
  4. Kajalsoni 02/02/2018
  5. Madhu tiwari 03/02/2018

Leave a Reply