संहल के रहना – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

विश्वास करना भरोसा भी रखनामगर मेरे साथी संहल के रहना। मुश्किल बड़ा है दुनिया में जीना धोखे हैं इतने जहर जैसे पीना। सहारा देना मरौअत भी करना मगर मेरे साथी संहल के रहना ।शातिर जितने बन गये अपराधीजूल्म उतना जितनी बड़ी उपाधि। प्रशासन से कहना चौकस रहना मगर मेरे साथी संहल के रहना ।बड़ी मछली खाती छोटी को जैसे तड़पता गरीब है रोटी को जैसे। मर्यादा है खाकी खादी का गहना मगर मेरे साथी संहल के रहना ।बहुत रंग देखे हैं दुनिया के हमने नेता अधिकारी नहीं देते दुख कमने। चारा न चखना घोटाला न करना मगर मेरे साथी संहल के रहना ।

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17 Comments

  1. Bhawana Kumari 28/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 29/01/2018
  2. C.M. Sharma 29/01/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 29/01/2018
      • C.M. Sharma 30/01/2018
        • Bindeshwar Prasad sharmaकक 30/01/2018
  3. Shishir "Madhukar" 29/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 30/01/2018
  4. डी. के. निवातिया 29/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 29/01/2018
  5. Kajalsoni 29/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 30/01/2018
  6. Bindeshwar Prasad sharmaकक 30/01/2018
  7. Anu Maheshwari 30/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 30/01/2018
  8. अरुण कुमार तिवारी 31/01/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 31/01/2018

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