मयकदा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

जब से देखें हैं सूरत तुम्हारी माँ कसम हम फिदा हो गये हैं। हमको मालूम नहीं था ये मंजर मिल के ऐसे जुदा हो गये हैं। अब जीना भी मुश्किल है मेरा दोस्त सारे अलविदा हो गये हैं। गुम कहां हो गये मेरे सपने खफा हमसे खुदा हो गये हैं। थी मरौअत नहीं दिल में तेरी अब इसलिए लापता हो गये हैं। दर्द अपना ही समझकर ऐ बिन्दु मय में बदलकर मयकदा हो गये हैं।

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15 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 26/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 26/01/2018
  2. Anu Maheshwari 26/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 26/01/2018
  3. Bhawana Kumari 26/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 26/01/2018
  4. Dknivatiya 26/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 26/01/2018
  5. C.M. Sharma 27/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 27/01/2018
  6. Ram Gopal Sankhla 27/01/2018
  7. Bindeshwar Prasad sharmaकक 27/01/2018
  8. Bindeshwar Prasad sharmaकक 27/01/2018
  9. Kajalsoni 27/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharmaकक 27/01/2018

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