काश ! हम बच्चे ही होते…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

काश ! हम बच्चे ही होते….दिल से हम फिर सच्चे होते….न कोई होता वैरी अपना…न हम किसी के दुश्मन होते…काश ! हम बच्चे ही होते….सुबह सुबह नहीं उठते जब हम…डांट रोज़ माँ की फिर खाते…झूट मूठ हम भी रूठ जाते…माँ के मनाने में प्यार हम पाते….काश ! हम बच्चे ही होते….नाम किसी का अपना न होता…कोई तोता कोई मैना होता…गधे किसी को हम बना के…उसकी पीठ पे लदे फिर होते…काश ! हम बच्चे ही होते….स्कूल में हम पढ़ने जाते…मन में लिए शरारत होते…निकाल किसी का खाना…चोरी से हम खाते होते…काश ! हम बच्चे ही होते….बेशक होते हम खुराफाती…पढ़ते और शरारत करते…पर किसी को न गाली बकते…इज्जत माँ बाप की करते होते…काश ! हम बच्चे ही होते….घर हो चाहे पडोसी का ही…अपना समझ के आते जाते…आँख नाक सिकोड़ते न हम…गर वो हमसे थोड़े छोटे होते….काश ! हम बच्चे ही होते….भेद भाव मन में नहीं होता…जाती धरम का नर्क न होता…राम रहीम के भारत में फिर…’चन्दर’ हम सब भारतीय होते..काश ! हम बच्चे ही होते….\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)(सभी को गणतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें…दिल से हम सब भारतीय होने का प्रमाण दें यही कामना है मेरी)

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14 Comments

  1. Bhawana Kumari 25/01/2018
    • C.M. Sharma 27/01/2018
  2. डी. के. निवातिया 25/01/2018
    • C.M. Sharma 27/01/2018
  3. ANU MAHESHWARI 25/01/2018
    • C.M. Sharma 27/01/2018
  4. Shishir "Madhukar" 25/01/2018
    • C.M. Sharma 27/01/2018
  5. Kajalsoni 25/01/2018
    • C.M. Sharma 27/01/2018
  6. Bindeshwar Prasad sharmaकक 26/01/2018
    • C.M. Sharma 27/01/2018
  7. Ram Gopal Sankhla 27/01/2018
    • C.M. Sharma 29/01/2018

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