ख्वाहिश

यूं तिनकों सी बिखरी मेरी ख्वाहिश
खूबसूरत रात की दास्ताँ कहती है
तेरे जाने के बाद भी पहरों तक
मेरे लबों पे इक जुम्बिश रहती है
केशुओं में तेरी उँगलियों की हरारत
हर ज़ुल्फ़ उनछुई सिहरन सहती है
लरजती पलकों पे तेरे लबों की आहट
किसी शरारत की कहानी कहती है
तेरे आगोश में आकर टूट जाने की
उस वक़्त बस यही कोशिश रहती है
कि डूब जाऊं तुझ में इस तरह से मैं
जैसे रेत दरिया के चश्मों संग बहती है
न जाने फिर कब आयेगा तू और
खूबसूरत सा वो मिलन होगा
कुछ तो छोड़ जाने की भी
दुनिया की इनायत रहती है
चल कुछ और नहीं तो बस तू फिर
लबों पे गवाही छोड़ जाना
सुना है कि कुछ ख़ास गवाहियां
बन के निशानियाँ रहती हैं

कपिल जैन

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9 Comments

  1. C.M. Sharma 25/01/2018
    • कपिल जैन 27/01/2018
  2. डी. के. निवातिया 25/01/2018
    • कपिल जैन 25/01/2018
      • Dknivatiya 25/01/2018
  3. Bhawana Kumari 25/01/2018
    • कपिल जैन 27/01/2018
  4. Kajalsoni 25/01/2018
    • कपिल जैन 26/01/2018

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