वो किसी और की हो गयी

शीर्षक–वो किसी और की हो गयीवो पास के गाँव की रहने वालीना जाने कब सेमेरे दिल में रहने लगीमुझे पता ही ना चलाउसके गाँव की सड़कमुझे उससे जोड़ने लगी थीरास्ते में चलते-चलतेकभी उतर जाती मेरी साईकिल की चेनवो देख कर हंसने लग जातीमुझे देख जोर से साईकिल की घंटी बजातीरास्ते में चलते-चलते वो पूछना कुछ चाहती तोमैं बस हकला कर रह जातावो हंसती रहतीमैं मुस्कुराता रह जातामैं कॉलेज के लाइब्रेरी में बैठकिताब के पन्नो में उलझा रह जातावो सखियों संग गप्पे लड़ातीजब भी मैं उसकी और ताकतावो कभी खिलखिला जाती तोकभी शर्मा कर रह जातीदेखते – देखते वक़्त ने हवा कर दिया था सब कुछउसका मेरा साथ भीदफ़न हो गया थामैं चाह कर भी रोक नहीं पाया थावो दिल मैं थी मेरे अब तकबस यही तो कहना थावो आज मेहँदी लगा कर बैठी थीपर उसके हाथों में मेरा नाम नहीं थावो आज बन गयी थी दुल्हनपर उसका घूँघट कोई और उठाने वाला थामैं भी तो गया थाउसकी शादी के निमंत्रण आने परवो सामने ही बैठी थीमन मेरा उसे उड़ा ले जाना चाहताजुबान बस हकला कर रह जाताशहनाई बजने लगी थीऔर मेरे नजर के सामने हीवो किसी और की हो गयी थीबिन कुछ कहे हीवो अलविदा कह गयी थी–अभिषेक राजहंस

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5 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 20/01/2018
  2. Shishir "Madhukar" 21/01/2018
  3. डी. के. निवातिया 22/01/2018
  4. अरुण कुमार तिवारी 24/01/2018
  5. Kajalsoni 25/01/2018

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