मेरे गाँव की लड़की

शीर्षक–मेरे गाँव की लड़कीमेरे गाँव की लड़कीअब पहले जैसी ना रहीसच है ये भीउन सभी सचो की तरह जो कभी लाद दिए जातेतुगलकी फरमान की तरहएक सच तो ये भी थाजब लडकियाँ अपने हाथ की छापगोबर के उपलो में ढूंढतीअपनी उँगलियों को रोटियां सेकने में झुलसातीउसकी अपनी कुछ इच्छाएँ भी थीइससे कहाँ किसी को कोई मतलब थाकुछो को तो इनका होना भी खटकता थाहाँ ये भी एक सच थामेरे गाँव की लडकियों का पर अब ऐसा नहीं हैदिन के उजाले के अँधेरे से डरने वाली लड़कियांअब खुद रौशनी फैला रहीसाईकिल का हैंडल थामसड़को से अपना रास्ता मांग रहीबेलन छोड़ कलमों को औजार बना रहीये सच है कीकुछ बदले या ना बदले मेरे गाँव मेंपर बदल रही लड़कियाँमुखर हो रही लड़कियाँसबल हो रही लड़कियाँमेरे गाँव की लडकियाँ —-अभिषेक राजहंस

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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/01/2018
  2. Madhu tiwari 18/01/2018
  3. डी. के. निवातिया 19/01/2018
  4. Kajalsoni 21/01/2018

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