कविता :– किसान कैसे तेरे हालात है, कवि :– अमन नैन

किसान कैसी तेरे हालात है रो रहा वर्तमान हैसामने तेरे अंधकार हैहै शीत कैसा पड़ रहावो थरथराता गात है है आधी अँधेरी रात तो भी किसान खेत में करते निरंतर काम हैंकिस लोभ से वह लेता नहीं विश्राम हैंखड़ी फसल जल रहीसूद-ब्याज बढ़ रहाबेटी की शादी के कर्जे के बोझ में निरंतर दब रहा कहर बाढ़ का भी सताता हैसूखा भी तुम्हे तड़पता है ठंड बीती बिना रजाई है सीने में अरमानो की आग निरंतर सुलग रही दुःख तो मेरा घर है सुख मेरा मेहमान हैकहते मुझको अन्न का दाताअमन यही मेरी पहचान हैअमन यही मेरी पहचान है

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7 Comments

  1. डी. के. निवातिया 16/01/2018
    • Aman Nain 16/01/2018
  2. Bindeshwar Prasad sharma 16/01/2018
    • Aman Nain 17/01/2018
    • Aman Nain 17/01/2018
  3. Kajalsoni 16/01/2018
    • Aman Nain 17/01/2018

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