आरजू-अरुण त्रिपाठी

*बस यही है आरजू*बह्र 2122 2122 2122 212बस यही है आरजू नज़रें झुका कर देख लो,बेवजह दो चार पल ही मुस्करा कर देख लो।देखना हो देख लो क्या चाहती है ये फिजां,इस फिजां की रूह में खुद को बसाकर देख लो।वक्त ने तुमको दिया है आजमाने का हुनर,आज मेरे दिल में क्या है आजमा कर देख लो।लिख रहा हूँ ये ग़ज़ल मैं आँसुओं में डूबकर,दर्द कितना है मुझे आँसू बहाकर देख लो।आशियाँ महफूज हो तूफां भले आते रहें,रुख हवा का है किधर शम्मा जला कर देख लो।जानना हो गर सितम,मुझ पर किया क्या वक्त ने,एक पत्थर लो उसे फिर बुत बनाकर देख लो। -‘अरुण’

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17 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  2. C.M. Sharma 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  3. डी. के. निवातिया 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  4. Bindeshwar Prasad sharma 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  5. Rajeev Gupta 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  6. Bindeshwar Prasad sharma 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  7. Bhawana Kumari 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  8. Kajalsoni 16/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018
  9. अरुण कुमार तिवारी 16/01/2018

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