बिछुरन की रैना…-अरुण त्रिपाठी

*बिछुरन की ये रैना पिया..*(विरह गीत)बिछुरन की ये रैना पिया,कासों हो अब चैना पिया।तुम हौ रूठे निंदिया लूटे,अँसुअन की रसधार न टूटे।साथ न दे अब नैना पिया,बिछुरन की ये रैना पिया,कासों हो अब चैना पिया।अँखियन में घिर आये बदरा,उमड़ि-घुमड़ि बह जाए कजरा|कोटि जतन ठहरै ना पिया,बिछुरन की ये रैना पिया,कासों हो अब चैना पिया।छन छन जरत जिया इत मानौ,हौ निरमोही मोह न जानौ।परबस दाह मिटै ना पिया,बिछुरन की ये रैना पिया,कासों हो अब चैना पिया।जरतै बूँदन सावन बीतै,चमक दमक तै बिजुरी जीतै।पवन बयार टरै ना पिया,बिछुरन की ये रैना पिया,कासों हो अब चैना पिया। -‘अरुण’

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14 Comments

  1. sukhmangal singh 15/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 15/01/2018
  2. C.M. Sharma 15/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 15/01/2018
  3. Kajalsoni 15/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 15/01/2018
  4. डी. के. निवातिया 15/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 15/01/2018
  5. Shishir "Madhukar" 15/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 15/01/2018
  6. Bhawana Kumari 15/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 15/01/2018
  7. Madhu tiwari 19/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 19/01/2018

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