अहो जान अहो प्रीतम प्यारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारेमुझको हो तुम सबसे न्यारेचाँद में तो धब्बे बहुत सारेपर तुम हो आंखों के तारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारेयू तो है लाखों में तारेपर तुम जैसे नही है सारेतुम तो हो मेरे ध्रुव तारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारेरूप अतुल प्रकाश बिखेरेमन चंचल नैना है तुम्हारेरातों दिनों बस छवि निहारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारेसाथ जो हो तो चहु ओर उजियारेदेख तुम्हे दिल भी तो हारेतन ऐसा बरसे अंगारे

अहो जान अहो प्रीतम प्यारेतुमसे ही दुख दूर हमारेतुमसे ही जीवन महका रेतुमसे ही ये दिल चहका रे

 कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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8 Comments

  1. Kajalsoni 15/01/2018
  2. डी. के. निवातिया 15/01/2018
  3. Bhawana Kumari 15/01/2018
  4. Madhu tiwari 19/01/2018

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