आखिर क्यों

बचपन में माँ तुने सिखाया थाखिलौना  छोड़ना अपने भाई के लिए।मेरे छोड़े  छोटे कपड़े कोतुमने दिया था मेरी बहन को।मैं जब रोई थी बहुत तोतुमने   नए  खिलौने कपड़े कावादा किया था मुझसे ।आखिर  मा ये छोड़ने की आदततुमने ही तो लगाया था।इसी आदत के कारणमुझे  छोड़ना पड़ा अपना प्रिय खिलौनानए खिलौने के खातिर।मुझे छोड़ना पड़ा अपना सितारे बाला फ्रांकनए फ्रांक के खातिर।आखिर छोड़ने की आदततुमने ही तो लगाया था मुझे।और  इस आदत के कारणछोड़ते  आ रही हूँ आज तकअपना सब कुछ दुसरो के खातिर।छोड़ना पड़ा अपना वह आँगनजहाँ गुंजी  थी हमारी किलकारियांदुसरे के आँगन के खातिर।छोड़ना पड़ा तुम्हें पापाभाई बहन और अपने  दोस्तो कोसिर्फ़ एक पति के खातिर।छोड़ना पड़ा अपना सपनासिर्फ़ सास ससुर के खातिर।यहाँ तक की नींद।छोड़ना पड़ा बच्चो अपने और परिवार।गहना छोड़ना पड़ान नद के खातिर।बेटा  छोड़ना पड़ाअपने बहु पोते पोतियो के खातिर।आखिर क्यों छोड़ती रहुं मेंअपना सब कुछ दुसरे के खातिर।और  एक दिन अपने पति का घर भीछोड़ना पड़ा बेटे बहूँ  के खातिर।और  जानती हूँएक दिन अपनी सांसे भीछोड़ना पड़ेगा किसी  ओर के खातिर।आखिर  क्यों क्यों क्यों ?तुमने मुझे छोड़ने का आदत लगाया।  

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14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 13/01/2018
    • Bhawana Kumari 15/01/2018
  2. Bindeshwar Prasad sharma 13/01/2018
    • Bhawana Kumari 15/01/2018
  3. C.M. Sharma 15/01/2018
    • Bhawana Kumari 15/01/2018
      • C.M. Sharma 16/01/2018
        • Bhawana Kumari 16/01/2018
  4. Kajalsoni 15/01/2018
    • Bhawana Kumari 15/01/2018
  5. डी. के. निवातिया 15/01/2018
    • Bhawana Kumari 15/01/2018
  6. Madhu tiwari 19/01/2018
  7. Bhawana Kumari 22/01/2018

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