|| कल को हम ना झाँक सके ||

जीवन का चौथापन आते ही, संध्या बेला ने डाला डेरा ।बीते समय की स्मृतियों का, मन मानस में कसा घेरा ॥ 1 ॥अनुभव स्मृतियाँ ही, जीवन की बहुमूल्य धरोहर होती हैं ।जीवन भर की अर्जित संपत्ति से भी, ज्यादा बढ़कर होती हैं ॥ 2 ॥प्राश्चयित का जो अनुभव करते, संध्या बेला करते अहसास ।आज की मस्ती में होकर मगन, कल के भविष्य का ना हुआ आभास ॥ 3 ॥यूँ तो सत्य है सर्वविदित, कि कल को कोई ना सकता झांक ।कल के गर्भ में क्या है छुपा, क्या सकता है कोई आंक ॥ 4 ॥किंतु नहीं आज के कर्म, कल का करवाते आभास ।यदि कर्ता सत्य को जान सके, हो जाता है कल का एहसास ॥ 5 ॥जीवन में हम बार अनेकों, आम छोड़ बोते बबूल ।कांटे जब चुभने लगते, तब जाकर पता चलती है भूल ॥ 6 ॥बुजुर्गों को कहते सुनते, बेटों ने हमको छोड़ दिया ।कष्ट सह सह पाला जिनको, बुढ़ापे में अब मुख मोड़ लिया ॥ 7 ॥सासें कोसती बहुओं को, इसने घर का नाश किया ।बेटे को किया वश में अपने, सुख शांति का सत्यानाश किया ॥ 8 ॥बूढ़े बेटों को कहते स्वार्थी, बेटे पिता को देते दोष ।किया क्या जीवन में तुमने, जिससे होता तुमको संतोष ॥ 9 ॥मानव मन का अहंकार, स्वीकार न करने देता भूल ।औरों को ठहरा कर दोषी, टालता जाता है प्रश्न मूल ॥ 10 ॥एक बूढ़े दम्पति ने पाकर पीड़ा, अपनी भूलों को किया स्वीकार ।प्राश्च्यित की बहती गंगा में लगाया गोते, जीवन से जब वे गये हार ॥ 11 ॥बोले जब मैंने घर छोड़ा, माँ के आंसू न रोक सके ।पिता के मन की पीड़ा को, स्वार्थी बन ना सोच सके ॥ 12 ॥परिवार को लेकर जब अलग हुए, भविष्य का ना एहसास हुआ ।बेटों ने जब दुहराया वही, तब भूलों का एहसास हुआ ॥ 13 ॥आज के स्वार्थ में हम, कल का परिणाम ना जान सके ।सेवा त्याग ना करते बना, आत्मा का कहा ना मान सके ॥ 14 ॥अब क्या करें प्राश्च्यित का भी, समय हाथ से निकल गया ।बिछड़ों को मिला सके जो फिर, संजोग हाथ से निकल गया ॥ 15 ॥केवल बहते आँसू ही, पीड़ा को कुछ कम कर देंगे |आजीवन ग्लानि सहेंगे हम, बीते कल को याद करेंगे || 16 ||बेटों से रखें अपेक्षा कैसे, जब हम ना भविष्य को झाँक सके |आज का किया कल सम्मुख होगा, यह भविष्य ना आंक सके || 17 ||किन्तु आगामी पीढी ना हो भोगी, इस हेतु करना होगा प्रयास |संस्कारों की फसल उगाकर, देनी होगी नूतन आस || 18 ||यद्यपि कर्म हमारे, भुगतने हमें ही होंगे |किन्तु उत्तम विचारों की देकर सीख, हम आत्म संतुष्ट अवश्य होंगे || 19 ||भावी पीढ़ी को हमें यह समझाना होगा, कि आगामी कल होता अनिश्चित |पर कर्मों को सुधार कर हम, कर हम कर सकते इसका पथ निश्चित || 20 ||हम भले ही कल को ना झाँक सके, पर अगली पीढ़ी को देंगे ज्ञान |भूल की हो ना पुनरावृति, नव पीढ़ी पाए सम्मान || 21 || अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव

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6 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma 13/01/2018
  2. AKHILESH PRAKASH SRIVASTAVA. 13/01/2018
  3. Shishir "Madhukar" 13/01/2018
  4. Kajalsoni 13/01/2018
  5. C.M. Sharma 15/01/2018
  6. डी. के. निवातिया 15/01/2018

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