भारती की आरती उतारिये-अरुण त्रिपाठी

*भारती की आरती उतारिये..*एक कण्ठ से सभी पुकारिये,भारती की आरती उतारिये|भातृ भाव मर्म ही विशेष हो,एकता ही धर्म हो न द्वेष हो|ऊँच-नीच क्लेश को बिसारिये,भारती की आरती उतारिये।एक कण्ठ से सभी पुकारिये!भारती की आरती उतारिये|चर्म वर्ण एक सा नहीं भले,नाड़ियों में एक वर्ण ही चले|वर्ण की उपासना सिधारिये,भारती की आरती उतारिये|एक कण्ठ से सभी पुकारिये!भारती की आरती उतारिये|भाँति-भाँति रंग वेश टोलियाँ,पुष्प के सुगन्ध सी हैं बोलियाँ|नेह वृन्त ले इन्हें सँवारिये,भारती की आरती उतारिये।एक कण्ठ से सभी पुकारिये,भारती की आरती उतारिये|हम कहाँ खड़े किधर चले-चले,प्रश्न की ये अवलियाँ जले जले|हिन्द की दशा-दिशा विचारिये,भारती की आरती उतारिये|एक कण्ठ से सभी पुकारिये।भारती की आरती उतारिये|भारती की आरती उतारिये।.. -‘अरुण’

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11 Comments

  1. डी. के. निवातिया 11/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 11/01/2018
  2. Kajalsoni 11/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 11/01/2018
  3. Shishir "Madhukar" 11/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 11/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 11/01/2018
  4. Bindeshwar Prasad sharma 11/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 12/01/2018
  5. C.M. Sharma 12/01/2018
    • अरुण कुमार तिवारी 12/01/2018

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