जमाना….. काजल सोनी

लोग डरते हैं जमाने से…..कि जमाना क्या कहेगा….और अक्सर फैसले बदल दिया करते हैं…..जो फैसला नहीं बदलते…..वो आशिक कहे जाते हैं या पागल…..पर जमाना जानता है….कि जमाने कि क्या है फितरत……सुनना, हंसना फिर भुल जाना……बदला हुआ हर फैसला…… अतीत बन कर कई बार सामने आता है……दिल दुखाता है…..कभी बहुत रुलाता है……..दर्द का कोई जमाना नहीं होता……जाने जमाना कहा गुम हो जाता है …..मगर खुश रहते हैं वो लोग ….जो अपने दिल की सुनते हैं……जमाने का क्या है…..हर रोज नये आशिकों और पागलों को तलाशती है……सिर्फ हंसने के लिए…….और किसी को हंसाना बुरी बात तो नहीं…..हा… हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा मेरी इन बातों पे जमाना हंसे शायद…… ” काजल सोनी “

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14 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma 13/01/2018
    • Kajalsoni 15/01/2018
  2. Shishir "Madhukar" 13/01/2018
    • Kajalsoni 15/01/2018
  3. Bhawana Kumari 13/01/2018
    • Kajalsoni 15/01/2018
  4. C.M. Sharma 15/01/2018
    • Kajalsoni 15/01/2018
  5. डी. के. निवातिया 15/01/2018
    • Kajalsoni 16/01/2018
  6. Rajeev Gupta 15/01/2018
    • Kajalsoni 16/01/2018
  7. Madhu tiwari 19/01/2018
  8. Kajalsoni 28/01/2018

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