गुनगुनी सी धूप — डी के निवातिया

गुनगुनी सी धूप

शरद ऋतू में पीली सुनहरी गुनगुनी सी धूपकुहासे की श्वेत चादर में लिपटे रवि का रूपफुर्रफुराती कलँगी में डाल-डाल फुदकते पंछीअच्छा लगे अलसायी बेलो का निखरता स्वरुप !!

डी के निवातिया

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12 Comments

  1. Bhawana Kumari 09/01/2018
    • डी. के. निवातिया 19/01/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma 10/01/2018
    • डी. के. निवातिया 19/01/2018
  3. अरुण कुमार तिवारी 11/01/2018
    • डी. के. निवातिया 19/01/2018
  4. Kajalsoni 11/01/2018
    • डी. के. निवातिया 19/01/2018
  5. Shishir "Madhukar" 11/01/2018
    • डी. के. निवातिया 19/01/2018
  6. C.M. Sharma 12/01/2018
    • डी. के. निवातिया 19/01/2018

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