लगता है वफ़ा कोई बड़ा जहर है

तेरी दुआओं में इतना असर हैकि मेरे घरवालों को तेरी खबर है

तू मेरे पास कुछ इस कदर हैनीम के पास चन्दन का शजर है

दूर है मुझसे तो क्या हुआतुझ पर नजर आठों पहर है

बहती गंगा में हाथ धो तो लूँलेकिन इसमें रहता कोई मगर है

सुना है कोई प्यासा मर रहा हैजिसकी खुद की एक नहर है

बेवफाई होती क्यों जल्दी हैलगता है वफ़ा कोई बड़ा जहर है

 कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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8 Comments

  1. Bhawana Kumari 09/01/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma 10/01/2018
  3. डी. के. निवातिया 11/01/2018
  4. Kajalsoni 11/01/2018

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