आरक्षण की समीक्षा

कुछ काले पन्ने भी छिपे हैं, भारत के इतिहासों में।दम तोङ सिसकती मानवता, भूखी प्यासी सांसो में।इतिहासो के वो कालिख भरे पन्ने खुलने चाहिए।जिन्होने शर्मसार की मानवता, उनको दंड मिलना चाहिए।।दंडित उनको होना था, दंड भुगतना पङा औरों को।कोतवाल को मिला दंड, जो मिलना था चोरों को।न्याय व्यवस्था झूठी पङ गयी, पतन के पाखंडों से।कब तक हम बच पायेंगे सच से, इन झूठे हथकंडो से।आरक्षण के मूल्यांकन की, सच में बहुत जरूरत है।पर सच में कहूं दोस्तों अब भी, नहीं सुधरी पूरी सूरत है।।- मनोज चारण ‘कुमार’रतनगढ़मो. 9414582964

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6 Comments

  1. Madhu tiwari 08/01/2018
    • manoj 24/09/2020
  2. Bhawana Kumari 08/01/2018
  3. Shishir "Madhukar" 08/01/2018
  4. Kajalsoni 11/01/2018
  5. manoj 24/09/2020

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