ग़ज़ल- बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

रूह में उतरकर क्यों अलविदा कह दिये सुकून मिला, जब अपना पता कह दिये। बेचैन होने लगे दिल धड़कने लगा खता क्या थी,लोग हमे बुरा कह दिये। पता ठिकाना बिल्कुल ही सही था मगर उनको ढूंढा, सबने लापता कह दिये । यादें मुलाकातें गुफ्तगू में ही रहा देखकर वे हमें,शादीशुदा कह दिये। बेइंतहा मुहब्बत एक तड़प दे गया घायल दिल वफ़ा होकर,बेवफा कह दिये। उनके चिलमन में पनाह जो थोड़ी मिली थी इश्क की बिमारी,लोग हवा कह दिये।

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10 Comments

  1. C.M. Sharma 05/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 09/01/2018
  2. Madhu tiwari 05/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 09/01/2018
  3. Bindeshwar Prasad sharma 05/01/2018
  4. डी. के. निवातिया 05/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 06/01/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 09/01/2018
  5. Kajalsoni 08/01/2018

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