नफरतों को छोड़कर , कलियाँ बहार की चुन

ऐ मेरे ! तू प्यार सुन , तू प्यार से मेरी धुन

नफरतों को छोड़कर , कलियाँ बहार की चुन

सुबह को उठता है एक माली , सुबह होती फूलों सेनई नई कलियाँ खिल गयी अब तो , न डर है शूलों सेकितने फूलों को जन्म देता , बनती माँ हर डालीसूरज जो सिर पर चमके तो , राजा समझे मालीछोड़कर , तू ईर्ष्या , तू माली जैसी कर धुननफरतों को छोड़कर……..आता है जो एक शिकारी , डाले दाना पानीफंस जाते कुछ भोले पंछी , या भूखे नादानीदेखो तीर चलाता है वो , अर्जुन समझ के खुद कोकर हत्या निर्दोषों की , वीर समझता खुद कोछोड़ कर , इस रीत को , तू प्रेम की माला फिर बुननफरतों को छोड़कर………कितने लोग अनोखे है , मन की बातें निरालीहर शाख पर पत्ते भिन्न ,अतरंगी हर डालीभिन्न भिन्न हो भाषा धर्म , एक हो सब खड़े होचाहे विपत्ति हो कैसी भी ,साथ मे सब अड़े होकितनी भी , तकलीफ हो , दिल की तो एक बार सुननफरतों को छोड़कर ……..

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

 

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

26 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/01/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 01/01/2018
  3. Kajalsoni 01/01/2018
  4. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 01/01/2018
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/01/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 02/01/2018
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/01/2018
  8. Ram Gopal Sankhla Ram Gopal Sankhla 27/01/2018

Leave a Reply