ग़ज़ल (दुनियाँ जब मेरी बदली तो बदले बदले यार दिखे)

हिन्दू देखे ,मुस्लिम देखे इन्सां देख नहीं पायामंदिर मस्जिद गुरुद्वारे में आते जाते उम्र गयीअपना अपना राग लिए सब अपने अपने घेरे मेंहर इन्सां की एक कहानी सबकी ऐसे गुजर गयीअपना हिस्सा पाने को ही सब घर में मशगूल दिखेइक कोने में माँ दुबकी थी जब मेरी बहाँ नजर गयीबदला बक्त मेरा क्या सबके चेहरे बदल गएमाँ की एक सी सूरत मन में मेरे पसर गयीदुनियाँ जब मेरी बदली तो बदले बदले यार दिखेतेरी इकजैसी सच्ची सूरत, दिल में मेरे उतर गयीमदन मोहन सक्सेना

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4 Comments

  1. Kajalsoni 28/12/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 29/12/2017
  3. Madhu tiwari 30/12/2017

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