ख़ामोश लबों से वो बस ये दुआ करते हैं,,,,

ख़ामोश लबों से वो बस ये दुआ करते हैं ,रहूँ सलामत मैं ,रब से ये इल्तिज़ा करते हैं,दर्द देती हैं उन्हें खामोशियाँ मेरी ,हर आह को मेरी वो सुना करते हैं,ख़ामोश लबों से वो बस ये दुआ करते हैं ,,,,,,,,,, दर्द से जब कभी चीख पड़ती हूँ मैं,जान निकलती है उनकी जो तड़पती हूँ मैं ,देने लगते हैं हिम्मत मुझे वो हर घड़ी,अपनी हिम्मत को जब खोने लगती हूँ मैं,बन सहारा वो हर कदम मेरे साथ चलते हैं ,ख़ामोश लबों से वो बस ये दुआ करते हैं ,,,,,,, हो जाऊँ न परेशां देख उनको परेशांसामने हर घड़ी वो मुस्कुराने लगे हैं,देख लूँ न कहीं मैं उन आंखों में शबनम,दर्द अपना वो मुझसे छुपाने लगे हैं,इस तरह से वो मुझपे इनायत करते हैं,ख़ामोश लबों से वो बस ये दुआ करते हैं ,,,,,,उनकी मुहब्बत के आगे करुँ सज़दे हज़ार,लूँ बलाएं मैं उनकी, लूँ सदके उतार ,बनके मेरी खुशी , हो गए हैं वो खुदाहो गए हैं एक, अब नहीं हम जुदा,सर झुका कर हम उनकी इबादत करते हैं,ख़ामोश लबों से वो बस ये दुआ करते हैं,रहूँ सलामत मैं, रब से ये इल्तिज़ा करते हैं ,,,,,,,।सीमा “अपराजिता “

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11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 28/12/2017
    • सीमा वर्मा 28/12/2017
  2. C.M. Sharma 28/12/2017
    • सीमा वर्मा 28/12/2017
  3. Bindeshwar Prasad sharma 28/12/2017
    • सीमा वर्मा 28/12/2017
  4. डी. के. निवातिया 28/12/2017
    • सीमा वर्मा 28/12/2017
  5. Kajalsoni 28/12/2017
    • सीमा वर्मा 29/12/2017

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