कड़वाहट जब छनके आयी है – मनुराज वार्ष्णेय

दिल की कोई आवाज कलम से आज तनके आयी हैपुरानी यादों से फिर से कोई तस्वीर बनके आयी है

बेचैनी जो हुई दिल मे कहीं तो हरकत हुई है अजबदिल मे फिर से मेरे कोई बात लहर बनके आयी है

वफ़ा के शहर में ये आज कैसा तूफान मचला हैलगता है कोई मीठी बात जहर बनके आयी है

हिज्र ही अब तो बेहतर है कि मैं तेरे पास न आऊँभोली सूरत तेरी जो सामने मेरे शैतान बनके आयी है

बेवजह ही नीम के नीचे खड़ा यूं आम की चाहत में थामालूम हुआ कि भ्रम हुआ है कड़वाहट जब छनके आयी है

 कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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20 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/12/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 28/12/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 28/12/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/12/2017
  5. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 28/12/2017
  6. Kajalsoni 28/12/2017

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