आवाज़ सिसकियों की दबी -दबी सी है,,,,,

आवाज़ सिसकियों की दबी -दबी सी है ,हर वक़्त आँखों में अब नमी सी है ,वक़्त अब तन्हां गुजरने लगा हैहर लम्हें में तेरी ही कमी – सी है ,आवाज़ सिसकियों की ,,,,,,,सर्द मौसम की सर्द हवाएं भी अब आग दिल में मेरे यूँ लगाने लगी हैंकतरा – कतरा पिघलता है दिल मेरा याद तेरी मुझे यूँ जलाने लगी हैमर जाएं न हम तेरी याद में सनमतेरे इंतज़ार में ये साँसें थमी -सी हैं आवाज़ सिसकियों की ,,,,,,,स्मृति के पन्नों पर हर – पलतेरी यादों के अक्स उभरते हैंहृदय वेदना के करुण स्वर आँखों से निर्झर बहते हैंतुम आओगे इस आस मेंनज़रें राहों पर जमी -सी हैंआवाज़ सिसकियों की ,,,,,,हृदयगति अब मंद हो चलीसाँसें भी हैं बोझिल-बोझिल खामोश हो रही धड़कन मेरी अँखियाँ भी हैं झिलमिल-झिलमिलअब आकर मुझको बाहों में भर लोसाँसें अब मेरी रुकी -रुकी सी हैंआवाज़ सिसकियों की दबी-दबी सी है,,,।सीमा “अपराजिता “

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18 Comments

  1. Madhu tiwari 26/12/2017
    • सीमा वर्मा 26/12/2017
  2. C.M. Sharma 26/12/2017
    • सीमा वर्मा 26/12/2017
    • सीमा वर्मा 26/12/2017
  3. Bhawana Kumari 26/12/2017
  4. सीमा वर्मा 26/12/2017
  5. डी. के. निवातिया 26/12/2017
    • सीमा वर्मा 26/12/2017
  6. Shishir "Madhukar" 26/12/2017
    • सीमा वर्मा 26/12/2017
  7. Kajalsoni 26/12/2017
    • सीमा वर्मा 27/12/2017
    • सीमा वर्मा 27/12/2017
    • सीमा वर्मा 27/12/2017
  8. Bindeshwar Prasad sharma 27/12/2017
    • सीमा वर्मा 27/12/2017

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