ज़िन्दगी….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

भीतर द्वन्द है अपने आप से…जीने मरने का…शोक उल्लहास का…ज़िन्दगी के हर पल का…जो जीया, जो नहीं जीया…व्यथा उभरती है कभी..संतुष्टि साँसों से निकलती है…धीमें से कभी…फिर खो जाती है…इच्छाओं में कहीं…ज़िन्दगी….चल रही है यूँ ही….रिश्ते, रोज़ नए बनते हैं…फिर टूट जाते हैं…अनचाहे…जो देखा नहीं उसपे विश्वास है…जो सामने है…पास है वो धोका है…अपना मन ही…छल रहा है….फिर भी चल रहा है…हर कोई….क्यूँ ?विश्वास प्रकीर्ति में है…भीतर…बाहर…चहुँ और….मानें या न मानें…मान गए तो…स्थिर…फिर कहीं कोई छल नहीं…कहीं कोई भागमभाग नहीं…आनंद की है…ज़िन्दगी…बह रही है…नस नस में…तेरी मेरी…ज़िन्दगी….\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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16 Comments

    • C.M. Sharma 26/12/2017
  1. Bhawana Kumari 23/12/2017
    • C.M. Sharma 26/12/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma 23/12/2017
    • C.M. Sharma 26/12/2017
  3. Shishir "Madhukar" 23/12/2017
    • C.M. Sharma 26/12/2017
  4. Kajalsoni 23/12/2017
    • C.M. Sharma 26/12/2017
  5. डी. के. निवातिया 23/12/2017
    • C.M. Sharma 26/12/2017
  6. Madhu tiwari 23/12/2017
    • C.M. Sharma 26/12/2017
  7. ANU MAHESHWARI 24/12/2017
    • C.M. Sharma 26/12/2017

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