चाँद सूरज फूल में बस यार का चेहरा मिला

हर सुबह रंगीन अपनी शाम हर मदहोश हैवक़्त की रंगीनियों का चल रहा है सिलसिलाचार पल की जिंदगी में मिल गयी सदियों की दौलतजब मिल गयी नजरें हमारी दिल से दिल अपना मिलानाज अपनी जिंदगी पर क्यों न हो हमको भलाकई मुद्द्दतों के बाद फिर अरमानों का पत्ता हिलाइश्क क्या है आज इसकी लग गयी हमको खबररफ्ता रफ्ता ढह गया तन्हाई का अपना किलावक़्त भी कुछ इस तरह से आज अपने साथ हैचाँद सूरज फूल में बस यार का चेहरा मिलादर्द मिलने पर शिकायत क्यों भला करते मदनजब दर्द को देखा तो दिल में मुस्कराते ही मिलामदन मोहन सक्सेना

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5 Comments

  1. Vimal Kumar Shukla Vimal Kumar Shukla 20/12/2017
  2. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 21/12/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/12/2017
  4. Kajalsoni 21/12/2017

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