घर में रहें राधा डरी डरी

छोड़ गए बृज कृष्ण, गोपी किस्से खेलें फ़ागकहला भेजा मोहन ने, नहीं वन वहाँ, क्या होंगे पलाश?नदियों में जल नहीं, न तट पर तरुवर की छायागोपियाँ भरें गगरी सार्वजनिक नल से, आये तो क्यों आये बंसीवाला?घर में रहें राधा डरी डरी, सड़कों पर न कोई उनका रखवालाअब तो आ जाओ तुम, का न हुई बड़ी देर नंदलाला?मथुरा में था एक ही कंस, बृज में हो गया कंसों का बोलबालाकब सुधि लोगे श्याम तुम, सुन लो राधा का नाला?अरुण कान्त शुक्ला16/12/2017

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8 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी अरुण कुमार तिवारी 16/12/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 16/12/2017
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 16/12/2017
  4. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 16/12/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 18/12/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 18/12/2017
  7. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 18/12/2017
  8. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/12/2017

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