कुर्सी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है…तेरी लीला बहुत न्यारी है….तेरे जन्म पे मैं बलिहारी है…हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है…अपना तेरा कोई धर्म नहीं…फिर भी दंगे हो जाए हैं…पल में दोस्त दुश्मन बनें…दुश्मन दोस्त हो जाए है…तेरी लीला बहुत न्यारी है….हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है…अनपढ़ हो या हो विद्वान्…तू सबको आसन देती है…तेरे मोह से वो भी बच न पाए…जो नैतिकता का ठेका लेते हैं…तेरी लीला बहुत न्यारी है….हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है…समय के साथ तू भी है बदली…नाटी, लंबी, मोटी कभी पतली…हो कैसी भी तू दिखती पर…लगती फिर भी प्यारी है…तेरी लीला बहुत न्यारी है….हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है…कभी सजाया शिक्षक ने तो…कभी चोरों का मान बढ़ा…कभी नारियल से पूजा तुमको…कभी संसद में उछाल दिया…तेरी लीला बहुत न्यारी है….हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है…समय समय के देव विराजे…मनुष्य, राक्षस गण भी साजे…लालच तुझ को पाने को…हर युग गए हथकंडे साधे…तेरी लीला बहुत न्यारी है….हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है…जब तक तेरा मोह रहेगा…प्रजा से विछोह रहेगा…बैठे कोई नैतिक धनवान…फिर होगा सबका कल्याण….हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है…तेरी लीला बहुत न्यारी है….\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

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12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 15/12/2017
    • C.M. Sharma 16/12/2017
  2. Bhawana Kumari 15/12/2017
    • C.M. Sharma 16/12/2017
  3. ANU MAHESHWARI 15/12/2017
    • C.M. Sharma 16/12/2017
    • C.M. Sharma 18/12/2017
  4. डी. के. निवातिया 16/12/2017
    • C.M. Sharma 18/12/2017
  5. Rajeev Gupta 19/12/2017
    • C.M. Sharma 20/12/2017

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