हिन्दुस्तान बन जाता है

अनेकता में एकता का भाव पैदा करे जो , सबसे बड़ा वो वरदान  बन  जाता है ।जाति पांति , रंग रूप का जो छोड़े भेद भाव , धर्मनिरपेक्ष वो महान बन जाता है ।नृत्य अतरंगी , सतरंगी वेश भूषा हो , ढेरों भाषाओं का समूह सबकी शान बन जाता है ।विश्व  नमन  करे  जिसको  फिर  वो ,  जगतगुरु  हिंदुस्तान  बन  जाता  है ।

 कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 12/12/2017
  2. C.M. Sharma 12/12/2017
  3. डी. के. निवातिया 12/12/2017
  4. ANU MAHESHWARI 13/12/2017
  5. Madhu tiwari 13/12/2017

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