माया नगरी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

क्या करोगे तुम क्या करोगे रो रो कर एक दिन तो ऐसे जाना सब छोड़ कर। प्रेम से रहना प्रीत से जीना ही सीखें गुस्से में आकर भैया अब क्यों चीखें । क्या करोगे अपना दिल ही तोड़ कर एक दिन……… ।भूल भुलैया माया नगरी पहचानो अब बेमोल बिकोगे ऐसा इसको जानो अब क्या करोगे पाई – पाई तुम जोड़ कर एक दिन……… ।यहीं मिलेगा फल तेरे करनी का भाई रे जान बूझकर करता क्यों जग हसाई रे भ्रम छोड़ो देखो अब आंखें खोल कर एक दिन तो ऐसे जाना सब छोड़ कर।

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14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 08/12/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 10/12/2017
  2. C.M. Sharma 08/12/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 10/12/2017
  3. डी. के. निवातिया 08/12/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 10/12/2017
  4. अरुण कान्त शुक्ला 08/12/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 10/12/2017
  5. Anu Maheshwari 08/12/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 10/12/2017
  6. Madhu tiwari 09/12/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 10/12/2017
  7. अरुण कुमार तिवारी 09/12/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 10/12/2017

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