जिंदगी तुम हो हमारी और तुम से जिंदगी है

जानकर अपना तुम्हें हम हो गए अनजान खुद सेदर्द है क्यों अब तलक अपना हमें माना नहीं नहीं हैअब सुबह से शाम तक बस नाम तेरा है लबों परसाथ हो अपना तुम्हारा और कुछ पाना नहीं हैगर कहोगी रात को दिन दिन लिखा बोला करेंगेगीत जो तुमको ना भाए वह हमें गाना नहीं हैगर खुदा भी रूठ जाये तो मुझे मंजूर होगापास वह अपने बुलाये तो हमें जाना नहीं हैजिंदगी तुम हो हमारी और तुम से जिंदगी हैये भला किसको बतायें और कुछ पाना नहीं हैमदन मोहन सक्सेना

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3 Comments

  1. md. juber husain md. juber husain 06/12/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/12/2017
  3. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 07/12/2017

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