जिस दिन

*उस दिन..*(अतुकांत)उस दिनछायेगी धुन्धमेरे कृतित्व की,उठेगा धुंआमेरी यादों का,फैलेगी खुशबूया दुर्गन्धमेरे कुकर्मो-सुकर्मों की|उस दिन,मैं भी कसा जाऊँगा,कर्म की कसौटी पर,मूल्यों और मानकों पर,चर्चा के बाज़ार में,सुलग उठूँगा अचानक,परख होगी मेरी भीहाँ!मेरी भी|उस दिन,चमक उठूँगा नेह के मोतियों में,या घृणा कीस्याह में,ढूंढ़ा जाऊँगा मैं भी तारों में,यादों की परछाईं में,गुम-सुम उदास आँगन में,ममता के गीले आँचल में।जिस दिनमैं चलूँगा, मैं जलूँगा,हाँ!मैं जलूँगा। -‘अरुण’

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8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 05/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी 05/12/2017
  2. C.M. Sharma 05/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी 05/12/2017
  3. अरुण कान्त शुक्ला 05/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी 05/12/2017
  4. डी. के. निवातिया 06/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी 06/12/2017

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