जन्नत है कहाँ?

जन्नत है कहाँ?जन्नत है कहाँ? जो, किसी को नसीब होगी,जमीं पर बसा सको तो, बसा लो यारोआप दूर कहाँ हुए, एकदम नज़रों के सामने हैं,रूबरू न तो न सही, ख़्वाब में मिलने आते हैं यारोख़ुदा को न बनाने दिया घर दिल मेंमिलने मस्जिद जाना पड़ता है यारोतुम्हें मालूम है, जमीं के मालिक हैं कितने अश्किया (क्रूर)सोचो जरा, आसमां में भी, ये सूराख़ बना रहे हैं यारोमहफूज रहना है कहर से तो, ख़ुदा से भी लड़ना होगासर झुकाकर की फ़रियाद, आज सुनता कौन है यारोअरुण कान्त शुक्ला27/11/ 2017

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8 Comments

  1. C.M. Sharma 04/12/2017
    • अरुण कान्त शुक्ला 05/12/2017
  2. Shishir "Madhukar" 04/12/2017
    • अरुण कान्त शुक्ला 05/12/2017
  3. डी. के. निवातिया 04/12/2017
    • अरुण कान्त शुक्ला 05/12/2017
  4. अरुण कुमार तिवारी 06/12/2017
  5. Inder Bhole Nath 06/12/2017

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