काहे का इंसान

काहे का इंसानजिसमे सेवा का भाव नहींमानवता का एहसास नहींजो खुद से ही अनजान हैंवह काहे का इंसान हैं!जिसमे ना देश की सोच हैंजो देश की ऊपर बोझ हैंयहाँ उसका ना कोई स्थान हैंवह काहे का इंसान हैं!जो हरदम ही दुख में रहता हैंजो औरों को भी दुख देता हैंजो हर सुख से अनजान हैंवह काहे का इंसान हैं!जिसके भीतर कोई प्यार नहींजिसके हो अच्छे विचार नहींनफ़रत ही उसकी शान हैंवह काहे का इंसान हैं!जो राम-रहीम के नाम पर लड़ रहाबिन बातों की जिद पे अड़ रहाजो ईश्वर का करता अपमान हैंवह काहे का इंसान हैं!जिसमे भरा अभिमान हैंना औरो का सम्मान हैंउसका झूठा सारा ज्ञान हैंवह काहे का इंसान हैं!✍🏻✍🏻मु.जुबेर हुसैन

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6 Comments

  1. C.M. Sharma 01/12/2017
    • md. juber husain 06/12/2017
  2. डी. के. निवातिया 01/12/2017
    • md. juber husain 06/12/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma 02/12/2017
    • md. juber husain 06/12/2017

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