|| अवकाश प्राप्ति ||

विदाई की घड़ी आई, भावनाओं ने लिया उबाल |भावुक होते हुए क्षणों ने, दिलों को ज्यों किया बेहाल || 1 ||भावनाएं ही आहत करतीं, भावनाएं ही देती हर्ष |भावनाओं की धारा में लगा के गोते, मानव पाता है उत्कर्ष || 2 ||मन से हम जिसे स्वीकारें, वह ही होता है मान्य |मन न जिसे स्वीकारे, वह होता सर्वथा अमान्य || 3 ||मन से हमने ना स्वीकारा, की मित्र हमारा बिछड़ गया |जब बिछड़ा ही नहीं कुछ भी हमसे, क्या है जो हमसे दूर गया || 4 ||भावुक होने का समय नहीं, यह समय है हर्षित होने का |सम्मान सहित अवकाश प्राप्ति हुई, यह क्षण है गर्वित होने का || 5 ||क्योंकि साठ साल के नौजवान ने, प्राप्त किया अवकाश | सठियाने की बात करें क्या, उमंगों की उड़ाने चूम रहीं आकाश || 6 ||’स्वीट सिक्सटी’ का छुआ पाला, ढलती आयु का निशान नहीं |मन में उठती उमंगों की उछालें, करवातीं ढ़लती आयु का भान नहीं || 7 ||जीवन में खोते पाते हुए भी, मुख पर सदा रहती मुस्कान |संसार से मिलते अनुभव ने दी, जीवन को नव पहचान || 8 ||क्या पाया जीवन में हमनें, पता बाद में चलता है |जीवन की बहती सरिता में अनुभव, नए रंग में ढ़लता है || 9 ||नियमों की बाध्यता करे अलग, मन से ना अलग हो सकते |यह सदा रहेंगे बीच हमारे, मन के सम्बन्ध ना कट सकते || 10 ||निर्विवाद सेवाएँ पूर्ण हुईं, हंस कार यारों विदा करो |उज्ज्वल भविष्य की करो कामना, मन को न कदापि अधीर करो || 11 ||विदाई के क्षणों में ना हो भावुक, हंस कार ‘मित्र’ को विदा करो |यह हमसे ना हुए अलग, हंस कार यह सच स्वीकार करो || 12 ||नव युग में हुआ पदार्पण, जीवन पथ सदा प्रशस्त |ईश्वर दे सारी खुशियाँ, सफलता करे प्रतिपल आश्वस्त || 13 ||जीवन में मिले वह सब कुछ तुमको, जिसके लिए हो सर्वथा योग्य |खुशियों की बहे सरिता प्रतिपल, जीवन रहे सब भांति योग्य || 14 ||अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव

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5 Comments

  1. अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव 30/11/2017
  2. C.M. Sharma 01/12/2017
  3. डी. के. निवातिया 01/12/2017
  4. AKHILESH PRAKASH SRIVASTAVA. 02/12/2017
  5. Shishir "Madhukar" 03/12/2017

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