रूठा सारा संसार पिये…

*रूठा सारा संसार पिये..*तुम रूठे हो, यूँ लगता है, रूठा सारा संसार पिये।तन मन दोनों हैं एक अगर,क्यों इतने तीखे वार पिये।क्या हार यहाँ,क्या जीत यहाँ, जीवन ये कोई खेल नहीं।है जीत अगर चाहत तेरी,हर हार मुझे स्वीकार पिये। जीवन भर की ,क्या बात करूँ, मैं इक लम्हे पे कहता हूँ।तुझ बिन बीते इक पल ग़र तो, है उस पल को इनकार पिये।फीके-फीके हैं रंग सभी तुम बिन, हर,रात अमावस सी।सुर हैं रूठे,उलझी तानें,सूनी है हर झंकार पिये।काला ये दिन काली रैना,मेरी किस्मत काली स्याही।मेरे हाथों की रेखा में,कालिख है बारम्बार पिये।इस मधुर मिलन की बेला में, जब कण-कण जग का पुलकित है।कलियाँ सारी खिलना चाहें, क्यों मेरा मन बेज़ार पिये।सच है मैं चुप रह जाता हूँ सब कुछ यूँ ही सह जाता हूँ।मैं भी तुझ सा ही कोमल हूँ , मुझमें भी है रसधार पिये। -‘अरुण’

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

10 Comments

  1. Abhishek Rajhans 29/11/2017
    • अरुण कुमार तिवारी 29/11/2017
  2. C.M. Sharma 29/11/2017
    • अरुण कुमार तिवारी 29/11/2017
  3. Shishir "Madhukar" 29/11/2017
    • अरुण कुमार तिवारी 29/11/2017
  4. डी. के. निवातिया 01/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी 12/01/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 02/12/2017
    • अरुण कुमार तिवारी 12/01/2018

Leave a Reply