बार-बार – डी के निवातिया

बार-बार

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वो कौन है जो दिल को दुखाता है बार-बार !अश्क बहते नहीं दिल करहाता है बार-बार !!

वफ़ा संग बेवफाई दस्तूर पुराना है जमाने काफिर क्यों दास्ताँ जमाने को सुनाता है बार बार !!

जी भर के खेला है, मनमर्जी तोडा मरोड़ा है,बड़ी संगदिली से रिश्ता निभाता है बार-बार !!

वो सितम करे,या रहम करे, किसे परवाह हैकुछ बात है जो दर्द-ऐ-दिल भाता है बार बार !!

“धर्म” को भी जिद है फना हो तो उसी के हाथ होइश्क में जां लुटाने में, मज़ा आता है बार बार !!

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डी के निवातिया

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26 Comments

  1. Rajeev Gupta 27/11/2017
    • डी. के. निवातिया 07/12/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 27/11/2017
    • डी. के. निवातिया 07/12/2017
  3. Shishir "Madhukar" 28/11/2017
    • डी. के. निवातिया 07/12/2017
  4. C.M. Sharma 28/11/2017
    • डी. के. निवातिया 07/12/2017
  5. sonu sahgam 28/11/2017
    • डी. के. निवातिया 07/12/2017
  6. अरुण कान्त शुक्ला 28/11/2017
    • डी. के. निवातिया 07/12/2017
  7. Abhishek Rajhans 29/11/2017
    • डी. के. निवातिया 07/12/2017
  8. Ram Gopal Sankhla 29/11/2017
    • डी. के. निवातिया 07/12/2017
  9. Shyam tiwari 04/12/2017
    • डी. के. निवातिया 07/12/2017
  10. Anu Maheshwari 10/12/2017
    • डी. के. निवातिया 11/12/2017
  11. Madhu tiwari 11/12/2017
  12. डी. के. निवातिया 12/12/2017
  13. सारांश 15/12/2017
    • डी. के. निवातिया 16/12/2017
  14. Kajalsoni 23/12/2017
    • डी. के. निवातिया 23/12/2017

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