नज़र मिलती है जब तुमसे – शिशिर मधुकर

नज़र मिलती है जब तुमसे तो तुम धीरे से हँसते होगुमां होता है ना तुमको तुम्हीं इस दिल में बसते होनशा होता है कुछ ऐसा मुहब्बत का तो दुनिया मेंपता होता है पीड़ा का मगर तुम फिर भी फँसते होलाख पहरे लगे हों दिल की सदा तो आ ही जाती हैमधुरता बढ़ती जाती है डोर जितना भी कसते हो फक़त दूरी बढ़ाने से दूरियाँ बढ़ ना जाती हैंछवि बस आँखों में भर के ही तुम हरपल तरसते होभले ही पास में मधुकर मेरे तुम आ ना पाते होमैं तुमको पा ही जाती हूँ जो मेघा बन बरसते होशिशिर मधुकर

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16 Comments

    • Shishir "Madhukar" 25/11/2017
  1. Rajeev Gupta 25/11/2017
    • Shishir "Madhukar" 25/11/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 25/11/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/11/2017
  3. अरुण कान्त शुक्ला 26/11/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/11/2017
  4. C.M. Sharma 27/11/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/11/2017
  5. डी. के. निवातिया 27/11/2017
    • Shishir "Madhukar" 28/11/2017
  6. Ram Gopal Sankhla 29/11/2017
    • Shishir "Madhukar" 29/11/2017
  7. Madhu tiwari 16/12/2017
    • Shishir "Madhukar" 16/12/2017

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