रहनुमा ग़ालिब नहीं तो कौन है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

रूह में न है खुदा तो, कौन है…तुम नहीं गर वो बताओ, कौन है….लफ्ज़ से वाकिफ नहीं हूँ, उससे मैं…लम्ज़ से मुझको दिखाओ, कौन है….हार कर मुँह फेर के बैठे हो क्यूँ….वक़्त से जीता बता, वो कौन है….बिखरी ज़ुल्फ़ें चहरा भी है बदगुमां….मौत सी खामोशियो, वो कौन है….इश्क़ का ये ज़हर ऐसा है ‘चन्दर’….जो न मर के जी उठे, वो कौन है…’चन्दर’ के सजदे ग़ज़ल में शेर के….रहनुमा ग़ालिब नहीं तो, कौन है….\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)लम्ज़ – स्पर्श

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12 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 23/11/2017
    • C.M. Sharma 25/11/2017
  2. Kajalsoni 24/11/2017
    • C.M. Sharma 25/11/2017
  3. अरुण कान्त शुक्ला 24/11/2017
    • C.M. Sharma 25/11/2017
  4. Shishir "Madhukar" 25/11/2017
    • C.M. Sharma 27/11/2017
  5. Rajeev Gupta 25/11/2017
    • C.M. Sharma 27/11/2017
  6. डी. के. निवातिया 27/11/2017
    • C.M. Sharma 28/11/2017

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