लकीर के फकीर — डी के निवातिया

लकीर के फकीर

!

अब से अच्छा तो, कल परसो का बीता जमाना थाअनपढ़, लाचारी में, लकीर के फकीर बन जाना थाक्या हुआ, पढ़-लिखकर, चाँद या मंगल पर बैठने सेजब होकर सभ्य,शिक्षित, यूँ अज्ञानी बन जाना था !!

!

डी के निवातिया

***

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

12 Comments

  1. Kajalsoni 21/11/2017
    • डी. के. निवातिया 04/12/2017
  2. C.M. Sharma 22/11/2017
    • डी. के. निवातिया 04/12/2017
  3. अरुण कान्त शुक्ला 22/11/2017
    • डी. के. निवातिया 04/12/2017
  4. Bindeshwar Prasad sharma 23/11/2017
    • डी. के. निवातिया 04/12/2017
  5. Shishir "Madhukar" 25/11/2017
    • डी. के. निवातिया 04/12/2017
  6. Rajeev Gupta 25/11/2017
    • डी. के. निवातिया 04/12/2017

Leave a Reply