न जाने क्यूँ…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

न जाने क्यूँ….मैं कोशिश कर रहा था…उसकी आँखें पढ़ने की…पर कुछ पढ़ नहीं पाया…चमक में उनकी….लब सिले न थे उसके…पर मैं कुछ सुन न पाया…लरजते लबों की कम्पन…शब्द सुनने की चाह में…आह भरी थी उसने एक…मुझे देखते हुए उसको…अकुलाहट थी या मसोस…बस तय नहीं कर पाया…हाँ ऐसा लगता था कहीं…ठक ठक सी हो रही है…दिल में मेरे ज़ोर ज़ोर से…क्यूँ? समझ नहीं पाया…अब जब सामने नहीं वो…गुमसुम सा लगता है…दिल में….साँसों में….न जाने क्यूँ….\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

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14 Comments

  1. डी. के. निवातिया 21/11/2017
    • C.M. Sharma 22/11/2017
  2. Kajalsoni 21/11/2017
    • C.M. Sharma 22/11/2017
    • C.M. Sharma 22/11/2017
  3. अरुण कान्त शुक्ला 22/11/2017
    • C.M. Sharma 24/11/2017
  4. Bindeshwar Prasad sharma 23/11/2017
    • C.M. Sharma 24/11/2017
  5. Shishir "Madhukar" 25/11/2017
    • C.M. Sharma 27/11/2017
  6. Rajeev Gupta 25/11/2017
    • C.M. Sharma 27/11/2017

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