क्यों बदली बदली ये नजरें

  क्यों बदली बदली ये नजरें , क्या दिल मे छुपाये बैठी होगर प्यार मेरा तुम चाहती हो , क्यों पलकें झुकाये बैठी होइक बार करो जो तुम हाँ फिर , मैं नगमे प्यार के गाऊँगामैं तुझमे खोकर ही खुद को , खुद में तुझको ही पाऊँगाचांदनी छलकती रातों में , या दिलमोही बरसातों मेंकांधे पर सिर तेरा हो और , मेहंदी के गुल मेरे हाथों मेंगर संभव हो कुछ ऐसा तो , पग भर इस राह पे मैं चल दूँमेरी नजरें तुझमे झांके , कुछ प्रेम की भाषा मैं पढ़ लूँहर स्वप्न हकीकत में तुम हो , हर पल अब से बस तेरा हैहर धड़कन में जो बस जाओ , तुम में जीवन पा जाऊँगाइक बार करो जो तुम हाँ फिर , मैं नगमे प्यार के गाऊँगामैं तुझमे खोकर ही खुद को , खुद में तुझको ही पाऊँगाबस इतनी अब इबादत है , तुझको पाने की चाहत हैदिल मे जो भरी बेचैनी है , बस तुझसे ही तो राहत हैजीवन संगीत जुड़ा तुझसे , हर सुर मेरा अब तेरा हैमेरे दिल पर जो बंधन है , उस पर तेरा ही पहरा हैतुम बस इतना करना प्रिये , एहसान जरा सा कर देनाउदगार जो उर में करा दोगी , तुम मे ही स्वर्ग पा जाऊँगाइक बार करो जो तुम हाँ फिर , मैं नगमे प्यार के गाऊँगामैं तुझमे खोकर ही खुद को , खुद में तुझको ही पाऊँगाकवि – मनुराज वार्ष्णेय  

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 21/11/2017
  2. डी. के. निवातिया 21/11/2017
  3. C.M. Sharma 21/11/2017
  4. Kajalsoni 21/11/2017
  5. अरुण कान्त शुक्ला 22/11/2017

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