गुरु

1गुरु ज्ञान देता हैंहमें पहचान देता हैजिस धरा पे गुरु का मान होता हैवह इश्वर का स्थान होता हैहै अमृत नहीं क्षीर सागर मेंगुरुमुख में उसका निर्माण होता है 2हीरे तराशता है जौहरीगुरु हीरा निर्माण करता हैकुम्हार गढ़ता है मिट्टी कोगुरु इंसान गढ़ता हैइंसानों के वेश में गुरु भगवान् होता है 3गुरु जब चाणक्य होता हैशिष्य चन्द्रगुप्त महान होता हैवसिष्ठ ,विश्वामित्र गुरु हो जबतब शिष्य भारत वर्ष का श्रीराम होता हैगुरु जब पीठ थपथपाएशिष्य कुरुक्षेत्र जीत जाता है 4गुरु जीवन दर्शन कराता हैजीवन की बारीकियां सिखलाता हैगुरु आस होता हैगुरु विश्वास होता हैअज्ञान का अँधेरा मिटाने कोगुरु सूर्य सा उदयमान होता है

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 20/11/2017
  2. Kajalsoni 20/11/2017
  3. डी. के. निवातिया 20/11/2017
  4. Shishir "Madhukar" 21/11/2017

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