हमाई एक नई बुंदेलखंडी कविता

एक मौडी से हमें , खूबई हतो प्यारलेकिन वा नई हती…,मिलवे को तैयारवा वी करत-ती…,का जाने काय से डरत-तीमिल गई एक दिना.., वा हमें बजारऊतई हमनें के दई, हमें खूबई है…तोसे प्यारऊकों पतो हतो के भैईया पीछो खडो़ हमारकेन लगी, हम इन चक्करों में नईया परतएक घुमा के दओ सो, जैहो गिरतऊतई- के- ऊतई हमाई आशिकी धरी- की -धरी रे गईवा आईती कछु केवे और कछु के गई      “भागचंद अहिरवार निराला”

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

4 Comments

  1. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 20/11/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/11/2017
  3. Kajalsoni 20/11/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/11/2017

Leave a Reply