अनजानी लड़की

    चाँद सा चेहरा हिरनी सी आँखे,थोड़ी झुकी नजरें वो राखे।मयूर सी चाल चिंता का पहरा,न जाने कौन सा है राज गहरा।सीधी सीधी चाल साधारण से कपड़े,चिंता कोई चल रही है उसे जकड़े।मुँह में तो जैसे जुबान ही नही,किसी से उसकी कोई जान ही नहीं।कभी हंसी उसके होठों पर न आए,न जाने कौन सा दुःख रहा सताये।कम बोलती जैसे कभी जुबान नही निकली,देखा नही कभी उसको करते किसी की चुगली।मस्तानी आँखे नाजुक सा चेहरा,घबराती ऐसे कर दिया जख़्म हरा।न जाने कौन सी छुपाये बैठी है बात,इस ‘अनजानी लड़की’ का क्या है राज।

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/11/2017
  2. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 21/11/2017

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