अनजानी लड़की

चाँद सा चेहरा हिरनी – सी आँखे,थोड़ी झुकी नजरें वो राखे।मयूर सी चाल चिंता का पहरा,ना जाने कौन सा है राज गहरा।सीधी सीधी चाल साधारण से कपड़े,चिंता कोई चल रही उसे जकड़े।मुँह में तो जैसे जुबान ही नही,किसी से उसकी कोई जान ही नही।कभी हंसी उसके होंठो पर न आये,न जाने कौन सा दुख रहा सताय।कम बोलती जैसे जुबान नही निकली,देखा नही करते कभी किसी की चुगली।मस्तानी आँखे उसकी नाजुक सा चेहरा,घबराती ऐसे जैसे कर दिया ज़ख्म गहरा।न जाने कौन सी छुपाये बैठी है बात,इस ‘अनजानी लड़की’ का क्या है राज।।

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5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/11/2017
  2. Kajalsoni 19/11/2017
  3. Arun Kant Shukla 20/11/2017
  4. C.M. Sharma 20/11/2017
  5. डी. के. निवातिया 20/11/2017

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