तेरी आँखों से क्यूँ नींद उडी रहती है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)… 

ये मुहब्बत भी मिटाने से न कभी मिटती है…आग ऐसी है जो बुझाने से और जलती है….दर्द में सुकून कभी सुकून में दर्द सा उठता है…नब्ज़ भी तो न वैद्य की पकड़ में रहती है….इश्क़ आलम भी अजीब रंग ढंग दिखाता है…दिन में चाँद निकले, रात सुनहली दिखती है…सपने दिल देखे खुली आँख रात भर उसके…दिन में सूरत उसकी जब कभी न दिखती है….हम थे पागल पर तुझको हुआ है क्या ‘चन्दर’…तेरी आँखों से क्यूँ नींद उडी रहती है….\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

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8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/11/2017
    • C.M. Sharma 20/11/2017
    • C.M. Sharma 20/11/2017
  2. Kajalsoni 19/11/2017
    • C.M. Sharma 20/11/2017
  3. डी. के. निवातिया 20/11/2017
    • C.M. Sharma 21/11/2017

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