रुआना आ गया – डी के निवातिया

रुआना आ गया

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कागज़, कलम, दवात, डायरी के पन्ने,ये सब तो अब बीते ज़माने कि बाते हैव्हाट्सप्प, ट्वीटर, फेसबुक, भी छोडोवीडियो कॉलिंग का ज़माना आ गया !

कुछ दबे-कुचले, मैले, कागज़ के टुकड़ेमिले एक पुरानी संदूकची से मुझे आजलिपटे हुए उनमे कुछ भविष्य के ख्वाबदेख उन्हें भूत में तब्दील, रुआना आ गया !!

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डी के निवातिया

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12 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 15/11/2017
    • डी. के. निवातिया 27/11/2017
  2. C.M. Sharma 16/11/2017
    • डी. के. निवातिया 27/11/2017
  3. Shishir "Madhukar" 16/11/2017
    • डी. के. निवातिया 27/11/2017
  4. ANU MAHESHWARI 16/11/2017
    • डी. के. निवातिया 27/11/2017
  5. अरुण कान्त शुक्ला 16/11/2017
    • डी. के. निवातिया 27/11/2017
  6. Kajalsoni 19/11/2017
    • डी. के. निवातिया 27/11/2017

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